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Friday, October 18, 2019

करवा चौथ

"कुछ इस तरह से इश्क़ की किश्तें भर रहा हूँ,
हर करवाचौथ पर अब मैं व्रत कर रहा हूँ,
बीवी है बैठी खाये, काजू, बादाम , पिस्ता,
और मैं तो चाय तक को भी तरस रहा हूँ "

"है चाँद भी अब दुश्मन, खिड़की से भी न झांके,
पाने को जिसके दर्शन, छलनी लिए खड़ा हूँ,
कृपा है श्रीमती जी की, जो साथ में खड़ी हैं,
वरना तो लेकर आसन पाटी, कब से वो पड़ी हैं"

"साल का ये एक दिन, है बड़ा गज़ब जी
बनने की आज शेर, हर एक चूहे को पड़ी है,
कहते हैं मियां अक्स, मत अतीत को तुम भूलो,
सामने फिर कल से, वही पुरानी शेरनी खड़ी है"

'अक्स,

Friday, January 4, 2019

बेटियाँ

"कहते हैं सब बेटियाँ पराई होती हैं,
मगर वो घर वालो के दिल में समाई होती हैं,
जहाँ में सबसे पहला स्थान है केवल माँ का,
जिसके चरणों में ईश्वर ने जन्नत बनाई होती है"

"माँ की ममता का होती हैं एक प्रतिरूप जहाँ,
बाप का मान सम्मान, गर्व होती हैं बेटियाँ,
कंचन,कोमल, कोमलांगी का होती हैं पर्यायवाची,
मगर वक़्त पड़ने पर रण चंडी भी बन जाती हैं बेटियाँ"

"माँ बाप से घर से निकल कर जब पहुँचे ससुराल वो,
दो परिवारो, दो संस्कारो के मिलन का उदगम होती है बेटियाँ,
अपने संस्कारो से नये परिवार को प्यार के धागे में पिरोती हैं,
सभी के जीवन का एक संबल बन जाती हैं बेटियाँ"

"घर के चोके चूल्‍हे से लेकर अंतरिक्ष तक पंख फैला रही,
अपने दम पर हर जगह खड़ी नज़र आती हैं बेटियाँ,
माँ, बेटी, बहन और ना जाने कितने किरदार निभाते हुए,
बेटो को पीछे छोड़कर सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ती हैं बेटियाँ"

"अक्स'

Saturday, January 30, 2016

धुंध भरी सुबह

"धुंध भरी सुबह में सड़क के एक ऒर, 
 जाने वो कौन चली जा रही थी,
 सुर्ख ओ स्याह सफेदी भरा चेहरा लिए,
 मानो ठण्ड को आगोश में भरे जा रही थी"
"सर से ढलकते दुपट्टे को सही करने में,
 खुद एक अजंता की मूरत बनी जा रही थी,
 मानो भिड़ने निकली हो बर्फीली हवाओं से,
 संभलती कभी लड़खड़ाये जा रही थी"
"अश्कों के बहते दरिया को थामने की कोशिश में,
 नैनो पर पलकों की लगाम लगाये जा रही थी,
 समय बीतने के साथ वो भी धुंधलाती हुई,
 शने: शने: धुंध में विलीन होती जा रही थी"
"धुंध भरी सुबह में सड़क के एक ऒर,
 जाने वो कौन चली जा रही थी"
                                          "अक्स"

Wednesday, January 27, 2016

शमा-परवाना

"ज्यों शमा करती है इंतज़ार किसी परवाने का,
तू भी आकर देख ले हाल अपने दीवाने का,
दीवानावार भटकता रहता है वो दर बदर,
होश कहाँ रहा उसे अब इस ज़माने का"

"महबूब के नाम का रोज़ पड़ता है कलमा,
उसी की रहगुज़र में सजदा उस मस्ताने का,
यादों में उसकी टूट कर यूँ बिखर गया है,
ज्यों छलकता जाम हो किसी पैमाने का"

"अपने नाज़ ओ अंदाज़ में वो गुम हैं इस कदर,
उन्हे इल्म ही नही किसी दिल के खो जाने का,
उनकी इसी अदा पर हम मर मिटें हैं अक्स ,
वरना दुनिया में कहाँ दम हमे आज़माने का"
                                                   "अक्स"

Sunday, May 10, 2015

" माँ "

"बच्चो की एक आह पर जिसका कलेजा हिल जाए,
दर्द औलाद को हो और आँख उसकी भर आए,
जो हमे फूलों पर सुला खुद कांटो पर सोती है,
हमे सुलाने की खातिर रात भर अपनी नींद खोती है,
वो माँ होती है, वो माँ होती है"
"कहते है परिवार एक फलदार व्रक्ष है,
पिता जिसका तना और औलाद फल होती है,
पर लोग ये क्यूँ भूल जाते हैं अक्सर,
कि इस पेड़ को जो जड़ सींचती ओर संभालती है,
वो माँ होती है, वो माँ होती है"
"हमारी हर अनकही अभिलाषा समझकर पूरा करती,
हमारे ताने ओर झिड़कियाँ सुनकर भी कुछ ना कहती है,
हम अपनी मस्ती में उसे भूल भी जाएँ तो क्या,
हर कदम हर पल हमारी सलामती की दुआ करती है,
वो माँ होती है, वो माँ होती है"
"भगवान का ज़मीन पर आना मुश्किल था,
अपनी बनाई दुनिया में निभाना मुश्किल था,
तो उसने हमे एक सौगात दे दी कुछ इस तरह,
जिसके आँचल में शांति और चरणो में जन्नत होती है,
वो माँ होती है, वो माँ होती है"
"अक्स"

Saturday, July 5, 2014

फरेब

"मैं इस कदर उसके वजूद में खोता रहा हूँ,
आसमान को भी अपने अश्को से भिगोता रहा हूँ,
वो उड़ ना जाए मेरे जेहन से किसी सपने की तरह,
अनगिनत रातों को खुली आखों से सोता रहा हूँ"

"अपनो ने भी उसी ज़ख़्म को जी भर कर कुरेदा,
जिसको हमेशा जी जान से मैं सीता रहा हूँ,
बेबसी के इस दौर में है हर शख्स गमजदा,
सज़ा उसके फरेब की मैं भी पाता रहा हूँ"

"क्यूंकर ना जला दूं मैं उसके झूठ का पुलिंदा,
हक़ीक़त हमेशा मान जिसे मैं जीता रहा हूँ,
उसके शबाब पर फिदा है दुनिया तो मुझको क्या,
मैं रुसवाइयां मिला हर जाम में पीता रहा हूँ"

"अक्स"

Monday, June 24, 2013

"मेरे पूजनीय माता पिता को समर्पित"

"उंगली पकड़ मुझे चलना सिखाया,
देकर सहारा मुझे उठना सिखाया,
निरा मिट्टी का एक ढेला भर था मैं तो,
घड़ घड़ जिसे तुमने इंसान बनाया"

"जीवन की पहली पाठशाला तुम्ही थे,
तुम्ही में पहला गुरु मैने पाया,
पहला सबक जीवन का पढ़ाया तुम्ही ने
बन पथ प्रदर्शक हमेशा जो काम आया"

"मेरी खातिर भुला दी रातों की नींद अपनी,
मगर मुझे सुख चैन की नींद सुलाया,
सहे कितने ही दुख तुमने मेरी वजह से,
खुशियों के पालने में मुझको झूलाया"

"जीवन की हर कठिन डगर पर संभाला तुम्ही ने,
बीन काँटे पग में फूलों का गळीचा बिछाया,
तुम्हारा ये क़र्ज़ चुकाने की ना हैसियत मेरी,
मैं हूँ भाग्यशाली, आपको माता पिता मैने पाया"

"अक्स"

Friday, May 25, 2012

हसरत

"उसकी हसरतों के नाम हमने ज़िंदगानी कर दी,
उसको पाने की खातिर हर मुश्किल बेमानी कर दी,
वो हँसती रही मेरी खाक हो चुकी हस्ती पर,
क्या जाने वो हमने खुद हर खुशी बेमानी कर दी"

"उसकी राह के काँटे चुन लिए अपने दामन में,
आबाद कलियों से उसके घर की हर गली कर दी,
आँसू कर लिए जज़्ब हमने अपने सीने में,
और लबो पर मुस्कान की एक झूठी कहानी कर दी"

"वो बेवफा खुश थी हमे इस कदर गम देकर,
एक इशारे पर जिसके निसार ये जवानी कर दी,
नज़रे इनायत के बदले मिली बेरूख़ी हमको अक्स,
यूँ उम्र भर तड़पने की दौलत हमारे नाम कर दी"

"अक्स"

Tuesday, March 27, 2012

अंजान

"जान बूझकर अंजान बना जाता है कोई,
हमारे दिल पर लाखो तीर चलाता है कोई,
छलनी हुए दिल से लहू टपकता तो क्या बात थी,
जख़्मो से बहते प्यार को ठुकरा कर चला जाता है कोई"

"निगाहों की एक जुम्बिश से हमे कत्ल पर डाला,
फिर हमी पर कातिल होने का इल्ज़ाम लगाता है कोई,
दामन ना उसका दागदार हो, हमने होठों को सिल लिया,
पर क्या करें, जब खुद ही बदन उघाड़े चला जाता है कोई"

"आज इस माहौल में क्या किसी का हो ऐतबार,
जहाँ परछाईं को भी ठग कर चला जाता है कोई,
उठा कर हाथ तुझसे अब क्या मांगू मैं या रब,
बिन माँगे ही मुझको सब कुछ दिए जाता है कोई"

"अक्स"