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Friday, October 18, 2019

करवा चौथ

"कुछ इस तरह से इश्क़ की किश्तें भर रहा हूँ,
हर करवाचौथ पर अब मैं व्रत कर रहा हूँ,
बीवी है बैठी खाये, काजू, बादाम , पिस्ता,
और मैं तो चाय तक को भी तरस रहा हूँ "

"है चाँद भी अब दुश्मन, खिड़की से भी न झांके,
पाने को जिसके दर्शन, छलनी लिए खड़ा हूँ,
कृपा है श्रीमती जी की, जो साथ में खड़ी हैं,
वरना तो लेकर आसन पाटी, कब से वो पड़ी हैं"

"साल का ये एक दिन, है बड़ा गज़ब जी
बनने की आज शेर, हर एक चूहे को पड़ी है,
कहते हैं मियां अक्स, मत अतीत को तुम भूलो,
सामने फिर कल से, वही पुरानी शेरनी खड़ी है"

'अक्स,

Monday, March 18, 2019

सुख चैन


"सुख चैन कहाँ वो नींद कहाँ,
जो दादा के संग मैं पाता था,
दादी की गोद में सर रख कर,
जब सपनो में उड़ जाता था"

"वो खेल खिलौने मिट्टी के,
यारों संग करना वो हुल्लड़,
जब मार कुलाँचे पेड़ो पर,
बस दम भर में चढ़ जाता था"

"जब फसल लहलहाती खेतो में,
तन मन को खुश कर जाती थी,
फिर शाम भरे चौपालो में ,
शुभ मंगल गान मैं गाता था"

"वो गिनकर रातों को तारे,
चारपाई पर उधम मचाता था,
फिर पापा की गुर्राहट से डरकर,
दादा के पीछे छुप जाता था"

"पौं फटे वो सुनना चिड़ियों का कलरव,
 बड़े बुज़ुर्गो को झुककर शीश नवाता था,
 जब खाड़िया पुती स्लेटों को झोले में लेकर जाते थे,
 शहतूत की बेंत के आगे सब भीगी बिल्ली बन जाते थे'
 

"वो सौंधी सौंधी सी यादें,
अब भी जीवन को महकाती हैं,
छुना चाहूं उनको जो हाथ बढ़ा,
बस पलकों को नम कर जाती हैं"

'अक्स'


Monday, September 17, 2018

इश्क़ ए नागवार

"इश्क़ ए नागवार का हम रोग ले बैठे,
एक संगदिल से क्यूं ये दिल लगा बैठे,
कहती है दुनिया जिसको एक खुशनुमा एहसास,
उसमे हम अपने सभी अरमान जला बैठे"

सीने से उठती रही दर्द की एक टीस,
हर टीस को अपनी हम धड़कन बना बैठे,
चाहा था जिस खुदगर्ज़ को दिल ओ जान से कभी,
उसकी हर एक याद को अपने जेहन से मिटा बैठे"

रफ्ता रफ्ता सरकती रही ये जिंदगी हर डगर,
अपनी हर एक मंज़िल का हम रास्ता भुला बैठे,
खुदा की इबादत में हमसे होने लगी नागा,
एक नाखुदा को जबसे हम खुदा बना बैठे"
'अक्स'

Monday, June 27, 2016

बेपरवाह ज़िंदगी

"बड़ी बेपरवाह हो गयी है ज़िंदगी आजकल,
इधर तो कभी उधर निकल पड़ती है,
आवारगी में इस कदर गुम हुई है,
अपनी राह ए मंज़िल को भूल पड़ती है"

"आब-ए-तल्ख़ में गिरफ्तार है इस कदर,
गफलत में गलिजो के लिए बिछ पड़ती है,
सजदे में सर झुकाती है शैतान को,
अंजुमन में नाशूक्रो के पड़ी रहती है"

"अपनी ज़िल्लत को भूल गयी है शायद,
जाने किस गुरूर में दोजख से गुज़र पड़ती है,
क्यूँ ग़ज़ल में समेटने की इच्छा रखता है अक्स,
ये वो शह है जो हर लय में बसर करती है"

"अक्स"

Saturday, January 30, 2016

धुंध भरी सुबह

"धुंध भरी सुबह में सड़क के एक ऒर, 
 जाने वो कौन चली जा रही थी,
 सुर्ख ओ स्याह सफेदी भरा चेहरा लिए,
 मानो ठण्ड को आगोश में भरे जा रही थी"
"सर से ढलकते दुपट्टे को सही करने में,
 खुद एक अजंता की मूरत बनी जा रही थी,
 मानो भिड़ने निकली हो बर्फीली हवाओं से,
 संभलती कभी लड़खड़ाये जा रही थी"
"अश्कों के बहते दरिया को थामने की कोशिश में,
 नैनो पर पलकों की लगाम लगाये जा रही थी,
 समय बीतने के साथ वो भी धुंधलाती हुई,
 शने: शने: धुंध में विलीन होती जा रही थी"
"धुंध भरी सुबह में सड़क के एक ऒर,
 जाने वो कौन चली जा रही थी"
                                          "अक्स"

Wednesday, January 27, 2016

शमा-परवाना

"ज्यों शमा करती है इंतज़ार किसी परवाने का,
तू भी आकर देख ले हाल अपने दीवाने का,
दीवानावार भटकता रहता है वो दर बदर,
होश कहाँ रहा उसे अब इस ज़माने का"

"महबूब के नाम का रोज़ पड़ता है कलमा,
उसी की रहगुज़र में सजदा उस मस्ताने का,
यादों में उसकी टूट कर यूँ बिखर गया है,
ज्यों छलकता जाम हो किसी पैमाने का"

"अपने नाज़ ओ अंदाज़ में वो गुम हैं इस कदर,
उन्हे इल्म ही नही किसी दिल के खो जाने का,
उनकी इसी अदा पर हम मर मिटें हैं अक्स ,
वरना दुनिया में कहाँ दम हमे आज़माने का"
                                                   "अक्स"

Tuesday, February 7, 2012

दिल-ए-गुमराह

"दिल-ए-गुमराह को राह पर लाया जाए,
बड़ा नादान है,इसे कुछ सिखलाया जाए,
यूँ तो कहने को हर शख्स यहाँ जिंदा है,
है मज़ा जब हर धड़कन का लुत्फ़ उठाया जाए"

"पत्थर के घरोंदो में अब जज़्बात नही बसते,
प्यार की ख़ुश्बू से हर चमन को महकाया जाए,
पड़ चुकी है जो ठंडी, बदलते समय की धारा में,
रिश्तों की उस गर्माहट को उफान पे लाया जाए"

"आज हर एक यहाँ अपने आप में ही गुम है,
ज़रा कुछ वक़्त औरो के लिए भी निकाला जाए,
पत्थर भी पिघलकर पानी बन सकता है अक्स,
अगर दिल में कुछ कर गुजरने का हौंसला जगाया जाए"

"अक्स"