Monday, June 27, 2016

बेपरवाह ज़िंदगी

"बड़ी बेपरवाह हो गयी है ज़िंदगी आजकल,
इधर तो कभी उधर निकल पड़ती है,
आवारगी में इस कदर गुम हुई है,
अपनी राह ए मंज़िल को भूल पड़ती है"

"आब-ए-तल्ख़ में गिरफ्तार है इस कदर,
गफलत में गलिजो के लिए बिछ पड़ती है,
सजदे में सर झुकाती है शैतान को,
अंजुमन में नाशूक्रो के पड़ी रहती है"

"अपनी ज़िल्लत को भूल गयी है शायद,
जाने किस गुरूर में दोजख से गुज़र पड़ती है,
क्यूँ ग़ज़ल में समेटने की इच्छा रखता है अक्स,
ये वो शह है जो हर लय में बसर करती है"

"अक्स"

Saturday, January 30, 2016

धुंध भरी सुबह

"धुंध भरी सुबह में सड़क के एक ऒर, 
 जाने वो कौन चली जा रही थी,
 सुर्ख ओ स्याह सफेदी भरा चेहरा लिए,
 मानो ठण्ड को आगोश में भरे जा रही थी"
"सर से ढलकते दुपट्टे को सही करने में,
 खुद एक अजंता की मूरत बनी जा रही थी,
 मानो भिड़ने निकली हो बर्फीली हवाओं से,
 संभलती कभी लड़खड़ाये जा रही थी"
"अश्कों के बहते दरिया को थामने की कोशिश में,
 नैनो पर पलकों की लगाम लगाये जा रही थी,
 समय बीतने के साथ वो भी धुंधलाती हुई,
 शने: शने: धुंध में विलीन होती जा रही थी"
"धुंध भरी सुबह में सड़क के एक ऒर,
 जाने वो कौन चली जा रही थी"
                                          "अक्स"

Wednesday, January 27, 2016

शमा-परवाना

"ज्यों शमा करती है इंतज़ार किसी परवाने का,
तू भी आकर देख ले हाल अपने दीवाने का,
दीवानावार भटकता रहता है वो दर बदर,
होश कहाँ रहा उसे अब इस ज़माने का"

"महबूब के नाम का रोज़ पड़ता है कलमा,
उसी की रहगुज़र में सजदा उस मस्ताने का,
यादों में उसकी टूट कर यूँ बिखर गया है,
ज्यों छलकता जाम हो किसी पैमाने का"

"अपने नाज़ ओ अंदाज़ में वो गुम हैं इस कदर,
उन्हे इल्म ही नही किसी दिल के खो जाने का,
उनकी इसी अदा पर हम मर मिटें हैं अक्स ,
वरना दुनिया में कहाँ दम हमे आज़माने का"
                                                   "अक्स"

Tuesday, September 29, 2015

फ़लसफ़े

'अंधेरो में रोशनी की किरण ढूँढ लेंगे,
 गमों में खुशी का एक पल ढूँढ लेंगे,
 कहती है जिसको जफ़ा ये सारी दुनिया,
 हम उस फ़लसफ़े में भी वफ़ा ढूँढ लेंगे"

"है फैला चहुं ओर बेखयाली का आलम,
हम इस आलम में भी एक अदा ढूँढ लेंगे,
तरसते रहे किसी की सरपरस्ती को हर पल,
अब खुदी में हम अपना रह्बर ढूँढ लेंगे"


"है तेरी सदा का इतना असर देख 'अक्स',
वीराने में भी आज गुल खिल उठे हैं,
हो ऐसा ही जज़्बा हर एक दिल में तो क्या,
ना हम दुनिया के लिए सुकून ढूँढ लेंगे"

'अक्स'

Sunday, May 10, 2015

" माँ "

"बच्चो की एक आह पर जिसका कलेजा हिल जाए,
दर्द औलाद को हो और आँख उसकी भर आए,
जो हमे फूलों पर सुला खुद कांटो पर सोती है,
हमे सुलाने की खातिर रात भर अपनी नींद खोती है,
वो माँ होती है, वो माँ होती है"
"कहते है परिवार एक फलदार व्रक्ष है,
पिता जिसका तना और औलाद फल होती है,
पर लोग ये क्यूँ भूल जाते हैं अक्सर,
कि इस पेड़ को जो जड़ सींचती ओर संभालती है,
वो माँ होती है, वो माँ होती है"
"हमारी हर अनकही अभिलाषा समझकर पूरा करती,
हमारे ताने ओर झिड़कियाँ सुनकर भी कुछ ना कहती है,
हम अपनी मस्ती में उसे भूल भी जाएँ तो क्या,
हर कदम हर पल हमारी सलामती की दुआ करती है,
वो माँ होती है, वो माँ होती है"
"भगवान का ज़मीन पर आना मुश्किल था,
अपनी बनाई दुनिया में निभाना मुश्किल था,
तो उसने हमे एक सौगात दे दी कुछ इस तरह,
जिसके आँचल में शांति और चरणो में जन्नत होती है,
वो माँ होती है, वो माँ होती है"
"अक्स"

Tuesday, July 15, 2014

दीदार ए तसव्वुर

"गुल से मिलकर इस कदर गुलज़ार हो गया,
मैं उनकी मोहब्बत में गिरफ्तार हो गया,
दीदार ए तसव्वुर की जो एक आस थी जगी,
रुखसार वो चिलमन के पर्दों में खो गया"

"यूँ तो बहारें आती और जाती हैं बदस्तूर,
मेरा चमन सदा के लिए खुशगँवार हो गया,
इस जहाँ में हर कली  का रस चूंसते भंवरे,
और मैं किसी कली का निगेह्बान हो गया"

"उस एक मुस्कुराहट पे सौ उम्र हैं कुर्बान,
तरन्नुम में जिसकी हर एक शख्स खो गया,
हर गली की मिट्टी में है एक सौंधी सी खुश्बू,
जिस भी डगर से वो बस एक बार ग़ुज़र गया"

"अक्स"

Saturday, July 5, 2014

फरेब

"मैं इस कदर उसके वजूद में खोता रहा हूँ,
आसमान को भी अपने अश्को से भिगोता रहा हूँ,
वो उड़ ना जाए मेरे जेहन से किसी सपने की तरह,
अनगिनत रातों को खुली आखों से सोता रहा हूँ"

"अपनो ने भी उसी ज़ख़्म को जी भर कर कुरेदा,
जिसको हमेशा जी जान से मैं सीता रहा हूँ,
बेबसी के इस दौर में है हर शख्स गमजदा,
सज़ा उसके फरेब की मैं भी पाता रहा हूँ"

"क्यूंकर ना जला दूं मैं उसके झूठ का पुलिंदा,
हक़ीक़त हमेशा मान जिसे मैं जीता रहा हूँ,
उसके शबाब पर फिदा है दुनिया तो मुझको क्या,
मैं रुसवाइयां मिला हर जाम में पीता रहा हूँ"

"अक्स"