Wednesday, November 7, 2012

दुर्दशा

"कड़कड़ाती ठंड में सड़क किनारे बैठी वो,
फटी साड़ी से अपने बच्चो को छूपाती हुई,
तेज हवा के तीरो से बचाने की कोशिश करती,
भर बाहों में उन्हे सीने से चिपटाती हुई"

"घनी धुंध में धीरे धीरे से घुलती हुई सी,
निर्बल शरीर को एक चादर सा बनाती हुई,
मानो अहिल्या इंतज़ार में पड़ी है राम के,
एक जीवित शिला का रूप अपनाती हुई"

"सड़क से आती रोशनी को ताकती पल पल,
दौड़ते वाहनो के धुएँ से शरीर को गर्माती हुई,
सूनी आँखों में सपने संजोए सुहाने कल के,
रोशनी के इंतज़ार में रात को अपनाती हुई"

"अक्स"


Friday, May 25, 2012

हसरत

"उसकी हसरतों के नाम हमने ज़िंदगानी कर दी,
उसको पाने की खातिर हर मुश्किल बेमानी कर दी,
वो हँसती रही मेरी खाक हो चुकी हस्ती पर,
क्या जाने वो हमने खुद हर खुशी बेमानी कर दी"

"उसकी राह के काँटे चुन लिए अपने दामन में,
आबाद कलियों से उसके घर की हर गली कर दी,
आँसू कर लिए जज़्ब हमने अपने सीने में,
और लबो पर मुस्कान की एक झूठी कहानी कर दी"

"वो बेवफा खुश थी हमे इस कदर गम देकर,
एक इशारे पर जिसके निसार ये जवानी कर दी,
नज़रे इनायत के बदले मिली बेरूख़ी हमको अक्स,
यूँ उम्र भर तड़पने की दौलत हमारे नाम कर दी"

"अक्स"

Wednesday, May 23, 2012

इंतज़ार


"कूचा-ए-दिल उसके इंतज़ार में है,
हमारी हर धड़कन उसके प्यार में है,
पलकें बिछा रखी हैं हमने उसकी आमद में,
ना जाने गुम वो रह्बर किस बाज़ार में है"

"हमारी तबीयत का शायद उसको इल्म ना हो,
वो बेख़बर जाने कहाँ किस हाल में है,
हमारी हर साँस में बसी है खुशबू उसकी,
उसका ही अक्स अब तो हर ख़याल में है"

"घर की ड्योढ़ी सूनी पड़ी है बिना उसके,
 राज उदासी का हर दर ओ दीवार पे है,
 हमारी आख़िरी आरज़ू तुझसे यही है या रब,
 मिला दे उससे ये तेरे ही अख्तियार में है"

"अक्स"

Monday, May 14, 2012

मेरा प्यार

"फूलों सा रंग ले के आया है यार मेरा,
खुश्बू से उस कली की महका है अंगना मेरा,
जूही की है कली वो या चंपा की है सहेली,
मादकता लिए गुलाब सी आया है यार मेरा"

"
हैं पंखुड़ी सरीखे, अधर उस परी के,
झीलों से गहरी आँखें जिनमे है नूर ठहरा,
लता सी है बलखाए वो पतली कमर उसकी,
ज़ुल्फो में घिरता बादल लाया है यार मेरा"

"
वो कस्तूरी सरीखी खुश्बू उस बदन की,
लिए हिरनी सी चपलता आया है यार मेरा,
आने से उसके हो गयी रंगीन मेरी दुनिया,
ये प्यार का कैसा खुमार लाया है यार मेरा"

"
अक्स"

Monday, April 30, 2012

मिलन

"ना बिताए जाते हैं मुझ पर ये पल,
जो तेरे मिलन की आस जगाते हैं,
नींद आँखों से कोसो दूर है मेरी,
अब खुली आँखों में सपने झिलमिलाते हैं"

"एक एक पल लगता है एक बरस के समान,
क्यूँ ये दो दिलों की दूरियाँ बढ़ाते हैं,
मिलन को दिल बेताब मेरा भी है और तेरा भी,
फिर क्यूँ ये रस्मो रिवाज़ बीच में अड़ जाते हैं"

"वो दिन दूर नही जब होगा तेरा हाथ मेरे हाथो में,
जिसका सपना कब से हम सजाते हैं,
दो जिस्म एक जान कहते हैं लोग हमको,
फिर क्यूँ हमारे दिल की धड़कन ना समझ पाते हैं"

फिर भी अनमोल हैं मुझको ये पल,
जो तेरे मिलन की आस जगाते हैं"

"अक्स

Tuesday, March 27, 2012

अंजान

"जान बूझकर अंजान बना जाता है कोई,
हमारे दिल पर लाखो तीर चलाता है कोई,
छलनी हुए दिल से लहू टपकता तो क्या बात थी,
जख़्मो से बहते प्यार को ठुकरा कर चला जाता है कोई"

"निगाहों की एक जुम्बिश से हमे कत्ल पर डाला,
फिर हमी पर कातिल होने का इल्ज़ाम लगाता है कोई,
दामन ना उसका दागदार हो, हमने होठों को सिल लिया,
पर क्या करें, जब खुद ही बदन उघाड़े चला जाता है कोई"

"आज इस माहौल में क्या किसी का हो ऐतबार,
जहाँ परछाईं को भी ठग कर चला जाता है कोई,
उठा कर हाथ तुझसे अब क्या मांगू मैं या रब,
बिन माँगे ही मुझको सब कुछ दिए जाता है कोई"

"अक्स"

Tuesday, February 7, 2012

दिल-ए-गुमराह

"दिल-ए-गुमराह को राह पर लाया जाए,
बड़ा नादान है,इसे कुछ सिखलाया जाए,
यूँ तो कहने को हर शख्स यहाँ जिंदा है,
है मज़ा जब हर धड़कन का लुत्फ़ उठाया जाए"

"पत्थर के घरोंदो में अब जज़्बात नही बसते,
प्यार की ख़ुश्बू से हर चमन को महकाया जाए,
पड़ चुकी है जो ठंडी, बदलते समय की धारा में,
रिश्तों की उस गर्माहट को उफान पे लाया जाए"

"आज हर एक यहाँ अपने आप में ही गुम है,
ज़रा कुछ वक़्त औरो के लिए भी निकाला जाए,
पत्थर भी पिघलकर पानी बन सकता है अक्स,
अगर दिल में कुछ कर गुजरने का हौंसला जगाया जाए"

"अक्स"