Wednesday, May 1, 2013

"हलाहल"


"ख़यालो की बहती हवा से गुज़रता,
तुम्हारा वो पहलू मुझे याद है,
छल छलाती पलकों से बहती नमी का,
वो पत्थरों को भी बहाना याद है"

"तुम्हारी तड़प से दिल धरती का दहला,
अभी भी वो मुझे घर का थरथराना याद है,
करता रहा कवायद तेरा गम मैं पी लूँ,
पर मुझे वो हलाहल का तड़पाना याद है"

"रातों की ये खामोशी मुझे करती है बेकल,
तेरा चाँदनी में गुनगुनाना याद है,
कभी शान था जो इस बहार ए चमन का,
धूल में उस फूल का मिल जाना याद है"
"अक्स"

Sunday, December 30, 2012

"इंतहा" 'भारत की बहादुर बाला दामिनी को समर्पित'


"बाबा के इस देश में,
दुनिया के ह्र्यदेश में,
घूम रहे नरभक्षी देखो,
इंसानो के वेश में"

"खुली सड़क पर चलना मुश्किल,
बंद बसो में हो रहा वार,
मा बहन नही कहीं सुरक्षित,
हर ओर हो रहा उन पे अत्याचार"

"बैठ बंद संसद में नेता,
कर रहे कोरी चीख पुकार,
मरता है कोई मरे बला से,
बस अपना अपना हो उद्धार"

"तिस पर भी हो गयी इंतहा,
ना रही लोकतन्त्र की सरकार,
माँग रही इंसाफ़ जो जनता,
डंडे की मिल रही है मार"

"अक्स"

Wednesday, December 5, 2012

वास्तविकता


"सर्दी की गुनगुनी धूप में बदन सेंकते हुए,
ओस से भीगी मिट्टी की खुशबू में मदमस्त,
पत्तियों की ओट से झाँकती कलियों को चिड़ाता,
फूलों पर मंडराते तितलियों के झुंड को बिखराते हुए"

"विदेशी कुत्तों को घुमाते हुए लोगो को ताकता,
कुत्तो के पहने मँहगे कपड़े देख आँखें फाड़ता,
अपने नंगे बदन पर बार बार हाथ फिराते हुए,
किसी के अधूरे छोड़े बिस्किट को तलाशता"

"वापस लौट उसी गंदे नाले के बगल में,
कूड़े के ढेर पर बनी टूटी झोपड़ी के पीछे,
कूड़े और नाले की गंध को अपने में बसाते हुए,     
अमीर के कूड़े में ग़रीब भारत अपना भविष्य तलाशता"

"अक्स"



Thursday, November 22, 2012

मेरा खोया गाँव


"कहाँ है सुबह की वो ठंडी ठंडी बयार,
छाँव देते पेड़ो पर वो पक्षियों की पुकार,
वो धूल भरा दगडा, निकलती जिसमे बुग्गी,
लहलहाती फसल देख हर्षित होता किसान"

"चौपाल पर होता वो मस्ती और हुल्लड़,
गूँजती वो रस भरे लोक गीतो की झंकार,
वो पौं फटे निकली गायों का रंभाना,
काँधे पे हल उठाये गुनगुनाते किसान"

जलते अलाव में भूनते चने, मूँगफली  बच्चे,
दादा की वो मीठी झिड़की और दादी का प्यार,
शादी के शामियानों में कूद फाँद करता बचपन,
शहनाई की मीठी धुन पर वो गीतो की तान"

"वो शाम ढले चलता गौधूलि का अंधड़,
पोखर में नहाते, मछली पकड़ते जवान,
आँखें तरस गयी हैं पाने को झलक इसकी,
पत्थर के जंगल में हरियाली  ढूंढता नादान"

"अक्स"

Wednesday, November 7, 2012

दुर्दशा

"कड़कड़ाती ठंड में सड़क किनारे बैठी वो,
फटी साड़ी से अपने बच्चो को छूपाती हुई,
तेज हवा के तीरो से बचाने की कोशिश करती,
भर बाहों में उन्हे सीने से चिपटाती हुई"

"घनी धुंध में धीरे धीरे से घुलती हुई सी,
निर्बल शरीर को एक चादर सा बनाती हुई,
मानो अहिल्या इंतज़ार में पड़ी है राम के,
एक जीवित शिला का रूप अपनाती हुई"

"सड़क से आती रोशनी को ताकती पल पल,
दौड़ते वाहनो के धुएँ से शरीर को गर्माती हुई,
सूनी आँखों में सपने संजोए सुहाने कल के,
रोशनी के इंतज़ार में रात को अपनाती हुई"

"अक्स"


Friday, May 25, 2012

हसरत

"उसकी हसरतों के नाम हमने ज़िंदगानी कर दी,
उसको पाने की खातिर हर मुश्किल बेमानी कर दी,
वो हँसती रही मेरी खाक हो चुकी हस्ती पर,
क्या जाने वो हमने खुद हर खुशी बेमानी कर दी"

"उसकी राह के काँटे चुन लिए अपने दामन में,
आबाद कलियों से उसके घर की हर गली कर दी,
आँसू कर लिए जज़्ब हमने अपने सीने में,
और लबो पर मुस्कान की एक झूठी कहानी कर दी"

"वो बेवफा खुश थी हमे इस कदर गम देकर,
एक इशारे पर जिसके निसार ये जवानी कर दी,
नज़रे इनायत के बदले मिली बेरूख़ी हमको अक्स,
यूँ उम्र भर तड़पने की दौलत हमारे नाम कर दी"

"अक्स"

Wednesday, May 23, 2012

इंतज़ार


"कूचा-ए-दिल उसके इंतज़ार में है,
हमारी हर धड़कन उसके प्यार में है,
पलकें बिछा रखी हैं हमने उसकी आमद में,
ना जाने गुम वो रह्बर किस बाज़ार में है"

"हमारी तबीयत का शायद उसको इल्म ना हो,
वो बेख़बर जाने कहाँ किस हाल में है,
हमारी हर साँस में बसी है खुशबू उसकी,
उसका ही अक्स अब तो हर ख़याल में है"

"घर की ड्योढ़ी सूनी पड़ी है बिना उसके,
 राज उदासी का हर दर ओ दीवार पे है,
 हमारी आख़िरी आरज़ू तुझसे यही है या रब,
 मिला दे उससे ये तेरे ही अख्तियार में है"

"अक्स"