"जंग ए आज़ादी में लड़ने वाले
वो दीवाने कुछ यूँ कर गुज़र गए,
न की खुद की परवाह न अपनों की,
वो तो बस एक आज़ादी पर मर गए"
"जाने क्या जूनून जज्ब था उनके दिल में,
जो हर मार को भी वो हंसकर सह गए,
कभी भूखे रहे तो कभी मार कोड़ो की भी सही,
चूम फाँसी के फंदे को भी विजयमाला कह गए"
"देकर भेटें अपने सिरों की वो दीवाने,
गर्व से सिर हमारा ऊँचा कर गए,
पर आज देख हालत अपने हिंद की अक्स,
कटे पर न झुके जो, वो सिर शर्म से झुक गए"
"अक्स"
Tuesday, January 11, 2011
Monday, January 3, 2011
सर्द रातें
"ये धुंधली सर्द रातों की तन्हाई,
हमे कुछ इस तरह तड़पाती है,
दफ़न कर चुके जो तेरी यादों के पन्ने,
हमे उनसे फिर रूबरू कर जाती है"
"हर वो मंज़र,वो पल जो कभी साथ गुजरा,
वो टीस दिल के जख़्मो को हरा कर जाती है,
दुनिया के दिए जख्म तो मैं सह गया हंसकर,
पर तेरी बेवफ़ाई मुझे हर पल रूलाती है"
"सर्द ये रातें ज़्यादा हैं या तेरा दिया गम,
इसी कशमकश में रातें बीत जाती हैं,
गुज़रता हर पल तेरी बेवफ़ाई याद दिलाता है अक्स,
फिर से आँखों में तेरी सूरत तैर जाती है"
"अक्स"
हमे कुछ इस तरह तड़पाती है,
दफ़न कर चुके जो तेरी यादों के पन्ने,
हमे उनसे फिर रूबरू कर जाती है"
"हर वो मंज़र,वो पल जो कभी साथ गुजरा,
वो टीस दिल के जख़्मो को हरा कर जाती है,
दुनिया के दिए जख्म तो मैं सह गया हंसकर,
पर तेरी बेवफ़ाई मुझे हर पल रूलाती है"
"सर्द ये रातें ज़्यादा हैं या तेरा दिया गम,
इसी कशमकश में रातें बीत जाती हैं,
गुज़रता हर पल तेरी बेवफ़ाई याद दिलाता है अक्स,
फिर से आँखों में तेरी सूरत तैर जाती है"
"अक्स"
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सर्द रातें
Tuesday, December 14, 2010
करण
शूरवीर वो दानवीर वो,
सूतपुत्र कहलाता था,
उसके बाणो की ग़रज़न से,
आकाश भी थर्राता था"
"रण्भूमि में पराक्रम से,
छक्के सबके छुड़ा दिए,
अर्जुन जैसे महारथी को,
नाको चने चबवा दिए"
"कुन्तिपुत्र करण वो एक था,
वचन जो बस निभा पाया,
होती क्या है शील सौम्यता,
मरते दम तक दिखलाया"
"अक्स"
सूतपुत्र कहलाता था,
उसके बाणो की ग़रज़न से,
आकाश भी थर्राता था"
"रण्भूमि में पराक्रम से,
छक्के सबके छुड़ा दिए,
अर्जुन जैसे महारथी को,
नाको चने चबवा दिए"
"कुन्तिपुत्र करण वो एक था,
वचन जो बस निभा पाया,
होती क्या है शील सौम्यता,
मरते दम तक दिखलाया"
"अक्स"
Friday, November 26, 2010
यादों की परछाई
"आज फिर सांसों में कोई याद महक आई है,
दिल में उभरे कई जख्म और आँखों में रुसवाई है,
एक दर्द बह चल पड़ा है संग लहू के मेरी रगो में,
जेहन पर छाई एक बीती यादों की परछाई है"
"एक बेवफा से मुहब्बत का सिला यूँ मिला हमको,
जिंदगी में गमो की एक कालिख बिखर आई है,
हमें दगा दिया किस्मत या उस बेवफा ने कौन जाने,
अंजाम हर सूरत में अब अपनी रुसवाई है"
"जाने किस बदनसीब की हमको लगी ये बददुआ,
वो खुश है इन्तहा जिसने मेरी खुशियों में आग लगाई है,
जलने लग पड़ा हूँ अब पल पल उसकी यादों में अक्स,
अब सहनी हमको उम्र भर ये जगहंसाई है"
"अक्स"
दिल में उभरे कई जख्म और आँखों में रुसवाई है,
एक दर्द बह चल पड़ा है संग लहू के मेरी रगो में,
जेहन पर छाई एक बीती यादों की परछाई है"
"एक बेवफा से मुहब्बत का सिला यूँ मिला हमको,
जिंदगी में गमो की एक कालिख बिखर आई है,
हमें दगा दिया किस्मत या उस बेवफा ने कौन जाने,
अंजाम हर सूरत में अब अपनी रुसवाई है"
"जाने किस बदनसीब की हमको लगी ये बददुआ,
वो खुश है इन्तहा जिसने मेरी खुशियों में आग लगाई है,
जलने लग पड़ा हूँ अब पल पल उसकी यादों में अक्स,
अब सहनी हमको उम्र भर ये जगहंसाई है"
"अक्स"
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यादों की परछाई
Sunday, November 7, 2010
ज़िंदगी के रूप
"जाने क्या क्या रंग दिखलाती है ज़िंदगी,
पल में गम,पल में खुशी दे जाती है ज़िंदगी,
गुजरती रहती है अविरत बहती सरिता की तरह,
ना एक पल भी ठहराव दिखलाती है ज़िंदगी"
"हर एक पल कटता है यूँ सदियों की तरह,
जब एक पल भी किसी को तड़पाती है ज़िंदगी,
दिन ओर रात आते हैं,गुज़र जाते हैं,
इसी समय धारा में बहती जाती है ज़िंदगी"
"अपनो के साथ जन्नत बन जाती है ज़िंदगी,
वरना तो दोजख से भी भयानक है ज़िंदगी,
लोग प्यार करके जाने क्यूँ साथ छोड़ देते हैं इसका,
प्यार का ही तो दूसरा नाम है ज़िंदगी"
'अक्स"
पल में गम,पल में खुशी दे जाती है ज़िंदगी,
गुजरती रहती है अविरत बहती सरिता की तरह,
ना एक पल भी ठहराव दिखलाती है ज़िंदगी"
"हर एक पल कटता है यूँ सदियों की तरह,
जब एक पल भी किसी को तड़पाती है ज़िंदगी,
दिन ओर रात आते हैं,गुज़र जाते हैं,
इसी समय धारा में बहती जाती है ज़िंदगी"
"अपनो के साथ जन्नत बन जाती है ज़िंदगी,
वरना तो दोजख से भी भयानक है ज़िंदगी,
लोग प्यार करके जाने क्यूँ साथ छोड़ देते हैं इसका,
प्यार का ही तो दूसरा नाम है ज़िंदगी"
'अक्स"
Wednesday, October 20, 2010
झूठा बंधन
"दर्द ए दिल अपना उनसे छुपाया न गया,
भूलना जो चाहा तो भुलाया न गया,
उसकी खातिर ठुकरा घर हम बन गए मजनू,
उस बेवफा से लैला का नाम तक अपनाया न गया"
"दावा करते थे मुहब्बत में जान देने का,
दौलत का वो झूठा बंधन तो ठुकराया न गया,
आह भरते रहे हम जख्म खाते रहे उसके लिए,
एक रेशा मरहम तक उस पर लगाया न गया"
"हम चीखते रहे उसके लिए सीना चीर फेंका,
हमारा नाम तक उससे लबो पे लाया न गया,
ये मेरी जिद थी की मैं बनाऊंगा उसको अपना 'अक्स'
जन्नत बसाने निकला था, एक गुलिस्ता तो बसाया न गया"
"अक्स"
भूलना जो चाहा तो भुलाया न गया,
उसकी खातिर ठुकरा घर हम बन गए मजनू,
उस बेवफा से लैला का नाम तक अपनाया न गया"
"दावा करते थे मुहब्बत में जान देने का,
दौलत का वो झूठा बंधन तो ठुकराया न गया,
आह भरते रहे हम जख्म खाते रहे उसके लिए,
एक रेशा मरहम तक उस पर लगाया न गया"
"हम चीखते रहे उसके लिए सीना चीर फेंका,
हमारा नाम तक उससे लबो पे लाया न गया,
ये मेरी जिद थी की मैं बनाऊंगा उसको अपना 'अक्स'
जन्नत बसाने निकला था, एक गुलिस्ता तो बसाया न गया"
"अक्स"
Monday, September 27, 2010
हिन्दी
"जो सबके मन को हर्षाती,
दिल को दिल से जो जुड़वाती,
हिन्दी ही है एक वो भाषा,
जो शहर प्रांत का भेद मिटाती"
"हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई,
सबके मुख पर ये चढ़ जाती,
एक दूजे के लिए बढ़ा प्रेम ये,
सबको प्रेम का पाठ पढ़ाती"
"सबके दिल में बसती है ये,
राजभाषा हिन्दी सबका आदर पाती,
प्रांत को प्रांत ओर देश को दिल से,
जोड़ हिन्दी देश का मुकुट कहलाती"
"अक्स"
दिल को दिल से जो जुड़वाती,
हिन्दी ही है एक वो भाषा,
जो शहर प्रांत का भेद मिटाती"
"हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई,
सबके मुख पर ये चढ़ जाती,
एक दूजे के लिए बढ़ा प्रेम ये,
सबको प्रेम का पाठ पढ़ाती"
"सबके दिल में बसती है ये,
राजभाषा हिन्दी सबका आदर पाती,
प्रांत को प्रांत ओर देश को दिल से,
जोड़ हिन्दी देश का मुकुट कहलाती"
"अक्स"
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