Tuesday, January 11, 2011

आज़ाद

"जंग ए आज़ादी में लड़ने वाले
वो दीवाने कुछ यूँ कर गुज़र गए,
न की खुद की परवाह न अपनों की,
वो तो बस एक आज़ादी पर मर गए"

"जाने क्या जूनून जज्ब था उनके दिल में,
जो हर मार को भी वो हंसकर सह गए,
कभी भूखे रहे तो कभी मार कोड़ो की भी सही,
चूम फाँसी के फंदे को भी विजयमाला कह गए"

"देकर भेटें अपने सिरों की वो दीवाने,
गर्व से सिर हमारा ऊँचा कर गए,
पर आज देख हालत अपने हिंद की अक्स,
कटे पर न झुके जो, वो सिर शर्म से झुक गए"

"अक्स"

1 comment:

sumit said...

Bhaut hi sundar kavita and bahut hi simple way me life ki sachai....

Gr8 work done and keep posting beautiful pics mere dost AKS.