Wednesday, April 20, 2011

तरन्नुम-ए-इश्क

"वादी-ए-इश्क में गूंजते थे मेरे नगमे जहाँ,
आज फुरकत-ए-मौशिकी का आलम फैला है,
वो एक दिल जो कभी धड़कता था मेरे लिए,
क्यूँ आज उसमे एक आंसुओं का रेला है"

"तैरती थी जिन आँखों में कभी मोहब्बत मेरी,
क्यूँ बस आज उन पलकों पर पानी फैला है,
मेरा नाम लेकर लरजते थे कभी जो दो लब,
आज उन पर क्यूँ एक गुमनामी का मेला है"

"कुसूर तेरा न मेरा, न किसी का है अक्स,
आज आबो हवा में मोहब्बत का रंग ही मैला है,
टूट कर बिखरने न दूंगा कभी प्यार के धागे,
मेरा प्यार आखिरी तू ही और तू ही पहला है "

"अक्स"

Friday, March 4, 2011

पाबंदी

"दिल मचलता है उनकी याद में ज्यों उफनता दरिया,
याद आती है हमे,रह रह कर तड़पाती है,
आँगन की मिट्टी ने डाल रखी हैं बेड़ियाँ पाँव में,
तोड़ने में जिनको घर की चौखट भी उखड़ जाती है"

"बेबस इधर मेरा दिल भी है, उधर मेरा हबीब भी,
दिन कटता दुहाई में, रात कशमकश में गुज़र जाती है,
वक़्त का दरिया बह रहा हम दो किनारो के बीच,
बहाव में जिसके कोई किश्ती ना ठहर पाती है"

"उदास आँखो से झरते आँसू झर झर,
बरसात भी जिनके आगे फीकी पड़ जाती है,
दहलीज़ लाँघने की कुव्वत उसमे है ना मुझमे,
हमारी मुहब्बत बस यूँ ही दम तोड़ती रह जाती है"

"अक्स"

Friday, February 25, 2011

मुकाम

"इजहार-ए-मोहब्बत जो अब हमने किया बशर,
बात निकली भी न थी कि लब थरथरा उठे,
हया की वो लाली उभर आई उन आँखों में,
जिसे देख ले जो एक बार मुर्दा भी जी उठे"

"हम हो गए कुर्बान उस हसीन चेहरे पर,
दिल अपना बस एक पल में हम गवां बैठे,
वो मुस्काई परेशान देख कर मुझको,
हमारे दिल में ख्वाबो के आफ़ताब जल उठे"

"तमन्ना है अब उसको हम-आगोश मैं कर लूँ,
बुझा लूं प्यास नजरो की न फिर ओर जल उठे,
तकाजा जिंदगी का है और खतरा मौत का अक्स,
इधर उसकी उठी डोली, उधर मेरा जनाज़ा उठे"

"अक्स"

Tuesday, February 22, 2011

एक ख्वाहिश

"जिंदगी तुझे गले लगाने की जुस्तजू है,
बीते लम्हे फिर से पाने की आरज़ू है,
हम-आगोश था मैं अभी तक अपने हबीब से,
अब सबके लिए कुछ कर जाने की जुस्तजू है"

"शाम-ए-खुर्शीद बह रही हवा के झोंके मानिंद,
मेरी रेत को हथेली में थामने की आरज़ू है,
सुबह की उफ़क बन गयी शफ़क मेरी,
हर दीद-ए-तहर को महर बनाने की जुस्तजू है"

"उखुव्वत हर बशर कर ले इस मकां में,
मौशिकी-ए-उल्फत का पयाम हो हर लब पर,
खाबिदा आलम न मुज़तर हो सुन मेरी ग़ज़ल,
हर दर पे एक फ़िरदौस बसाने की जुस्तजू है"

"अक्स"

Thursday, February 17, 2011

राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र - एक नज़र

हिंद की ये जान है, हिंद की ये शान है,
सूचना के क्षेत्र में ये हिंद का अभिमान है,
काम कर बड़े बड़े, सर हिंद का उठा रहा,
बसती हिंद के हर दिल में इसकी ही एक जान है,

हिंद की ये जान है, हिंद की ये शान है,
सूचना के क्षेत्र में ये हिंद का अभिमान है,

शाम ए गुलिस्ताँ को हिंद की, सूरज नया दिखला दिया,
सूचना का प्रसार कर, घर घर में ही पहुंचा दिया,
हटा के कागजो का ढेर कंप्यूटर वहां लगा दिया,
आई टी के क्षेत्र में बना ये एक वरदान है,

हिंद की ये जान है, हिंद की ये शान है,
सूचना के क्षेत्र में ये हिंद का अभिमान है,

तोड़कर सीमाएं सारी सूत्र एक बना दिया,
नेटवर्क का जाल सारे हिंद में फैला दिया,
कश्मीर से कन्याकुमारी तक बनाया बाँध एक,
भाषा और क्षेत्र का भी भेद तक मिटा दिया,
सारे हिंद में हो रहा बस इसका ही गुणगान है,

हिंद की ये जान है, हिंद की ये शान है,
सूचना के क्षेत्र में ये हिंद का अभिमान है,


"अक्स"

Thursday, January 20, 2011

आधुनिकता

"आज के इस आधुनिक युग में,
समय बड़ी तेज़ी से बदल रहा है,
जहाँ मनाते थे पहले खुशियाँ संग संग,
आज इंसान दूसरे के गम से भी कट रहा है"

"बदल रही है हर रिश्ते की परिभाषा,
रगो में बहता सुर्ख लहू पानी हो रहा है,
भाई भाई को काट रहा पैसे की खातिर,
बेटा मां की कोख की कीमत अदा कर रहा है"

"भावनाओ की कीमत हो गयी है शून्य अब,
आँसू भी आज बाज़ार में बिक रहा है,
यही चलन है इस आधुनिक दुनिया का अक्स,
तिस पर भी मानव खुद को विकसित कह रहा है"

"अक्स"

Sunday, January 16, 2011

टूटा दिल

"दिल मेरा तोड़ कर गुलिस्ताँ भी कुचल डाला,
फूल की औकात क्या कली को भी मसल डाला,
बेरहम पत्थर दिल से निकलती नहीं कभी दुआ,
हमारी सिसकियों ने पत्थर को भी मोम कर डाला"

"रो दिया आकाश भी मेरे लहू के रंग से,
सुबह ओ शाम का उसने फ़र्क ही मिटा डाला,
तारे भी टूट टूट कर गिरने लगे ज़मीन पर,
मेरी सदा ने एक दिन जब उनको भी हिला डाला"

"उनके दिए की रोशनाई ज़िंदगी काली कर गयी,
मेरी खुशी ओर गम का उसने मतलब ही बदल डाला,
जीते रहे, मरते रहे हम उसकी याद में अक्स,
शायद उसने मेरी याद का कतरा कतरा बहा डाला"

"अक्स"