Wednesday, November 7, 2018

दीवाली


"दीवाली जगमगाते दियो का त्योहार है,
इस उमंग में डूबा हर एक परिवार है,
लक्ष्मी गणेश का आशीर्वाद बरस रहा सभी पर,
सत्य की हर ओर हो रही जय जय कार है,
दीवाली जगमगाते दियो का त्योहार है"

"अंधेरे पर रोशनी की जीत का है एक प्रतिरूप,
अपनो संग मिलने का विचार अंगीकार है,
माता पिता, बंधु जन  सभी खुश हैं,
दुख और अंधकार न किसी को अब स्वीकार है,
दिवाली जगमगाते दियो का त्योहार है"

"हर्ष ओ उन्माद फैला है हर तरफ,
मिठाई, मेवों और पटाखों की भरमार है,
भिन्न भिन्न रंगों के संगम से बन रही रंगोली,
पुष्पमालाओं से सजा आज हर द्वार है,
दीवाली जगमगाते दियो का त्योहार है,
दीवाली जगमगाते दियो का त्योहार है"

'अक्स'

Monday, October 29, 2018

काश

"काश तू मेरे एहसासो को समझ पाता,
मेरी तरह ही एक रोज़ कभी मुझसे जुड़ पाता,
हर उफनता दरिया एक तूफान नही होता,
 तू मेरे अश्कों के सैलाब को दबा पाता"

"सिल की तरह छिन्न भिन्न हो चुके अरमान मेरे,
उन्हें बीनकर फिर से जोड़कर, एक घरौंदा बनाता,
चाहे मेरी हस्ती को एक किरायेदार ही रहने देता,
तू मेरे नाम को सबसे अनमोल बना जाता"

"क़यामत के रोज़ जब खुदा से जिरह होती,
बन पैरोकार मेरे वजूद की बहस में जुट जाता,
अंजाम ए मोहब्बत की परवाह ना होती अक्स,
 तू समय के हर सफे पे मोहब्बत लिख जाता"

"काश तू मेरे एहसासो को समझ पाता,
मेरी तरह ही एक रोज़ कभी मुझसे जुड़ पाता"


'अक्स'

Monday, September 17, 2018

इश्क़ ए नागवार

"इश्क़ ए नागवार का हम रोग ले बैठे,
एक संगदिल से क्यूं ये दिल लगा बैठे,
कहती है दुनिया जिसको एक खुशनुमा एहसास,
उसमे हम अपने सभी अरमान जला बैठे"

सीने से उठती रही दर्द की एक टीस,
हर टीस को अपनी हम धड़कन बना बैठे,
चाहा था जिस खुदगर्ज़ को दिल ओ जान से कभी,
उसकी हर एक याद को अपने जेहन से मिटा बैठे"

रफ्ता रफ्ता सरकती रही ये जिंदगी हर डगर,
अपनी हर एक मंज़िल का हम रास्ता भुला बैठे,
खुदा की इबादत में हमसे होने लगी नागा,
एक नाखुदा को जबसे हम खुदा बना बैठे"
'अक्स'

Sunday, June 24, 2018

राह ए मुकाम


"राह ए मुकाम में मेरी, मुश्किलों का आशियाना है,
फिर भी हमे तो अपनी, हर मंज़िल को पाना है,
अपनों का साथ हो अगर, कट जाता है हर सफ़र,
वरना अकेले भी चलकर, बस जीवन जीते जाना है"

"रास्ते में किसी पड़ाव पर, कभी रुकता हूँ चार पल,
वरना इस जीवन सरिता में, अविरत ही बहते जाना है,
काम, दंभ, लोभ , मोह, सब इस पथ में कठिनाईं हैं,
जो इनसे पार पा सका, उसने ही जीवन जाना है"

"उम्र के हर एक पड़ाव पर, हमने सीख ये पाई है,
बढ़ना है अगर जग में आगे , धारा के विपरीत जाना है,
जिस दौर के हम बाशिंदे हैं, वहाँ हर पथ पर उम्मीदें हैं,
इन उम्मीदों को राह बना, हमे हर मंज़िल को पाना है"

"अक्स"

Sunday, March 25, 2018

एक तमन्ना

"बेफिक्र मस्ती के संग मनमौजी स्वभाव,
कभी न रुकते कदम और वो स्वछन्द उड़ान,
ज़िन्दगी के उन क्षणों को जीना चाहता हूँ,
 मैं फिर से बच्चा हो जाना चाहता हूँ,"

"वो धूल भरे दगड़ो में दौड़ लगाना,
पेड़ पर लटकते फलो को पत्थर से गिराना,
पल भर में रूठना और फिर से मान जाना,
 उन पलों से फिर से झगड़ना चाहता हूँ,
मैं फिर से बच्चा हो जाना चाहता हूँ"

"पापा की मीठी फटकार, मां का वो दुलार,
भाइयों बहनो से होती वो मीठी तकरार,
मामा, चाचा के घर फिर से उधम मचाना चाहता हूँ,
मैं फिर से बच्चा हो जाना चाहता हूँ,
मैं फिर से बच्चा हो जाना चाहता हूँ"

"अक्स"

Saturday, December 24, 2016

तन्हा

" सुबह तन्हा मेरी हर शाम तन्हा,
गुजर गयी यूँ ही उम्र तमाम तन्हा,
मेरा था क्या मेरा है, क्या मेरा होगा,
मेरी आमद में बजता हर सितार तन्हा"

" तेरी खुशबू से महकती थी जो वादी कभी,
आज तेरे इंतज़ार में हर गुल औ गुलज़ार तन्हा,
तेरे आने की खबर कुछ इस कदर बिखरी,
इसकी जद में जो आया वो हर शख्श तन्हा"

"समंदर ने जो उछाली हैं लहरे ज्वार में,
लहरो से छिटकी वो हर एक बूँद तन्हा,
कौन गहरा है,  समंदर या मन तेरा अक्स,
वाजिब नहीं जवाब जब दोनों का ही सार तन्हा"

"अक्स"

Monday, October 31, 2016

बदलाव

"दिन और रात में इंसान को बदलते देखा है ,
हमने अपनों के ज़ज्बात को बदलते देखा है,
आपसी उठा पठक की इस अनकही जंग में,
लोगो को हालात के हाथों मरते देखा है"

"हर एक की गर्दन फसी है दूसरे के हाथों में,
हमने खरबूजे से छुरी को कटते देखा है,
 मेरे अपने ही मुझे जिन्दा दफन कर गए,
उनके हाथो मैंने एहसास को मरते देखा है"

"जाने मुझे कहाँ लेकर जाती है परवाज़ मेरी,
हमने स्वछन्द परिंदों की उड़ान को देखा है,
सोचता हूँ ये कब, कहाँ और कैसे बंद होगा,
इन सुर्ख आँखों ने जो मंजर ए इंतकाम देखा है"

"ज़िन्दगी का हर कदम अब बे अंत, बेरंग है,
हमने फूलों के हाथों कांटो को मरते देखा है,
 नहीं कुछ बचा अब और क्या कहूँ अक्स,
हमने ज़िन्दगी के हाथों मौत को मरते देखा है"

"अक्स"