Sunday, February 22, 2009

मुकाम

"आज फिर कोई अपना मुझे याद आया है
दिल का दर्द काग़ज़ पर उतर आया है
बहने लग पड़ा है अतीत के पन्नो पर
जिनमे छुपा प्यारा सा कोई साया है"

"इस जहाँ में मैं किसे अपना कह दूँ
सभी ने मुझे यहाँ ठुकराया है
गैरो से करूँ भला शिकवा क्यूँ कर
जबकि मेरा साया भी अब पराया है"

"ठोकरें खाई हैं पल पल यहाँ मैने
दर्दो गम की वह्सत दिल में उभर आई है
तलाश में ना जाने किसकी साहिल
राह पर लगी नज़रों में नमी उतर आई है"

"जब कभी किसी को मैने माना अपना
उसी ने मुझे ज़िंदगी के हाथो छलवाया है
तमन्ना है फिर भी हासिल हो उसे तमाम खुशियाँ
जिसने मुझे इस मुकाम पर पहुँचाया है"

"अक्स"

Monday, February 9, 2009

अस्तित्व

"मैं अकेला ही खड़ा हूँ दुनिया के मयखाने में,
अजब गजब से रंग भरे हैं जीवन के पैमाने में,
चखता रहता हूँ मैं इनको,बदल बदल कर अपना मन,
फिर भी नहीं है मिलता चैन मुझको इस जमाने में"

"शॅमा ओर परवाने का किस्सा,जहाँ ये कहता रहता है,
समय नहीं मिला है मुझे,खुद को आज जलाने में,
चाँद चकोरी की वो व्यथा,गुजरती है मेरे भी दिल से,
टीस उठी है जो एक दिल में, दब जाती नज़राने में "

"जाने क्या एहसास महकता रहता है मेरे इस दिल में,
समय नहीं मिलता जो लिख दूँ, उसको आज अफ़साने में,
परी कथा से लगते हैं सब, मुझको अपने सारे सपने,
कुछ भी नहीं अस्तित्व जिनका, दुनिया के वीराने में"

Sunday, December 21, 2008

पहली नज़र

"जब मैने देखा उसे पहली बार
में देखता रहा उसे बार बार
कोई नूर था उसके चेहरे में ऐसा
लगा मुझे हो गया उससे प्यार"

"सच में वो था पहली नज़र का प्यार
जो कर गया मेरे मन को बेकरार
जब बेकरारी में मैं हो गया जार जार
पूछा किसी से क्या यही है प्यार"

"कहा उसने ना ज़मीन पर, ना आसमान पर
है कोई नहीं जो बताए क्या है प्यार
सृष्टि के कण कण में फैला है प्यार
ये वही बतलाए जिसे हुआ हो प्यार"
कैसे मिले इस बैचेनी से मन को करार"

"पर जब मैने देखा उसे अगली बार
उसकी आँखों में भी झलका था प्यार
वो भी थी कुछ कहने को बेकरार
यही था हमारा पहली नज़र का प्यार"


"अक्स"

दुनिया का खेल

"दुनिया है एक अजब तमाशा
लगता है सबको अच्छा सा
झूंठे हैं सब रिश्ते इसके
कोई नहीं है यहाँ किसी का"

"लगते हैं सब खेल खिलोने
जिन्हे चलाता उपर वाला
कब कौन मिलेगा,कौन बिछ्डेगा
समझ नहीं कोई ये पाता"

"फसें हैं हम भी मोहज़ाल में
है कोई प्यारा सा हमे जो भाता
मन कहता है छोड दे सब
पथ पर कोई नज़र ना आता"

"दुनिया के हैं खेल निराले
लगते हैं सब भोले भाले
फिर भी नहीं कोई सुहाता
ये दुनिया है एक अजब तमाशा"

"अक्स"

दर्द ए दिल

"हमारे गमो का नहीं कोई ठिकाना
जिसे ना किसी ने समझा ना किसी ने जाना
समझते रहे हम जिसे उमर भर अपना
बना गया वही हमे पल भर में बेगाना"

"देते रहे दुआ रहो खुश उमर भर
पर ना मिलने कभी हमसे आना
कर दिया अंत दो लफ़्ज़ों में कहानी का
कोई बताए हमे क्या अब मतलब ज़िंदगानी का"

" बन गयी है ज़िंदगी अब नीरस नाकाम
जीना पड़ेगा उमर भर पीते हुए दर्द ए दिल का जाम"

"अक्स"

साया

"दूर कहीं बादलों के सामें
एक तस्वीर नज़र आती है
कुछ धुंधली, कुछ गुमसुम्म सी
हर पल खामोश नज़र आती है"

"वो नाराज़ है शायद मुझसे
तभी ना देख मुस्कुराती है
आता हूँ शायद नज़र जब उसको
आँखें उसकी छलक जाती हैं"

"उसको मनाने का मन बना रहा हूँ
वो मुझे देखने से भी कतराती है
दो पल सुकून को आँखें बंद करता हूँ
वो तस्वीर दिल में उभर आती है"

"अक्स"

ख्वाब

"मेरे ख्वाबो में हर पल
एक अक्स उभरता रहता है
पल में बनता , पल में बिगड़ता
हर वक़्त सँवारता रहता है"

"वो मेरा ख़याल है या चाहत
मेरा दिल ये पूछता रहता है
नहीं जानता खुद ये साहिल
हर वक़्त तड़पता रहता है"

"वो ख़याल कब बनेगा हक़ीकत
हर पल सोचता रहता है
ख़याल ओ ख्वाब की जद्दोजेहद में
वो अक्स उभरता रहता है"

"अक्स"