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Monday, February 9, 2009

अस्तित्व

"मैं अकेला ही खड़ा हूँ दुनिया के मयखाने में,
अजब गजब से रंग भरे हैं जीवन के पैमाने में,
चखता रहता हूँ मैं इनको,बदल बदल कर अपना मन,
फिर भी नहीं है मिलता चैन मुझको इस जमाने में"

"शॅमा ओर परवाने का किस्सा,जहाँ ये कहता रहता है,
समय नहीं मिला है मुझे,खुद को आज जलाने में,
चाँद चकोरी की वो व्यथा,गुजरती है मेरे भी दिल से,
टीस उठी है जो एक दिल में, दब जाती नज़राने में "

"जाने क्या एहसास महकता रहता है मेरे इस दिल में,
समय नहीं मिलता जो लिख दूँ, उसको आज अफ़साने में,
परी कथा से लगते हैं सब, मुझको अपने सारे सपने,
कुछ भी नहीं अस्तित्व जिनका, दुनिया के वीराने में"

Monday, November 10, 2008

वो

"दर्दे दिल बयान करूँ भी तो कैसे
यहाँ दिल की सदा कोई सुनता नहीं
दामन में मेरे ही बस उलझे हैं काँटे
कोई उनको यहाँ क्यूँ चुनता नहीं"

"वो जो अगर आज हमारी होती,
आरजू मेरी ना यूँ कुँवारी होती,
दिल की खलवतो में बसती वो,
मेरी दुनिया में ना वीरानी होती "

"जिंदगी में कुछ मुकाम ऐसे भी आते हैं
जब नहीं मिलती राही को मंजिल उसकी
भटकता रहता है वो दर बदर साहिल
उसके अपने भी साथ छोड़ जाते हैं"

"जला कर घर मेरा उन्हें क्या मिला साहिल
हमसे कहते तो हम उनका दर्द भी अपना लेते !"


"
कुछ यों मौसम-ए-हाल बना रक्खा है मैने
दिल में तेरी जुदाई का गम पाल रक्खा है मैने
ना जाने तू क्यूँ नाखुदा हो गया साहिल
फिर भी तुझी को खुदा मान रक्खा है मैने"

"अक्स"